निर्गुंडी के उपयोग (उपेश्वर ठाकुर) nirguni ka upyog (upeshwar thakur)

निर्गुंडी के उपयोग
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आपको बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि निर्गुंडी एक बहु उपयोगी औषधि पौधा है जो ना केवल मनुष्य की शारीरिक व्याधि बल्कि पशुधन एवं कृषि के लिए भी अत्यंत उपयोगी है ।

हम आज शारीरिक व्याधियों में निर्गुण्डी के उपयोग पर विस्तार से जानकारी देने का प्रयास करेंगे ।

निर्गुंडी वात , कफ नाशक तथा पित वर्धक एक प्रसिद्ध औषधि है। 

आइये इसके उपयोगिता को जाने यह लेख स्वानुभूतप्रयोग पर आधारित है 


१ . मुख व जीभ के छाले :-- दो-तीन पत्ती को चबा कर कुछ देर मुंह में रखें फिर थूक दें या अंदर घुटक लें। 

२ . टाँसिल :- दस पत्ती को उबालकर गरारा करें तीन चार दिन सुबह- शाम । 

३ .अपच:- दस पत्ती का काढ़ा बनाकर सेवन करें १५दिन सुबह खाली पेट । 

४ .गैस, कब्ज एसीडीटी में :- दस पत्ती को  काढ़ा बनाकर सेवन करें सुबह खाली पेट १५दिन। 

५ . पूरे शरीर में सूजन (शोथ) :- १०पत्ती का काढ़ा बनाकर सेवन करें साथ ही ५० ग्राम पत्ती को उबालकर स्नान करें ।

६ . एलर्जी :-  एलर्जी में १० पत्ती का काढ़ा बनाकर नियमित कुछ दिन सेवन करें तथा शिलाजीत सत् ठंड के दिनों में एक चने के दाने के बराबर तथा गर्मी में एक मूंग के दाने के बराबर दुध या गुनगुना पानी में मिलाकर खाना खाने के बाद सेवन करें। 

७ . घुटना या जोड़ के दर्द गठिया वात में :- ५० ग्राम पत्ती को कूट कर ४००ml  पानी लेकर काढ़ा बनायें जब १००ml पानी बचे तो ३०-३०ml सुबह, दोपहर, शाम को खाली पेट सेवन करें तथा प्रभावित अंग की सिकाई करें सिकाई करने का तरीका इस प्रकार ---५० ग्राम पत्ती को कूट कर थोडा प्योर सरसों तेल मिलाकर तवा में गरम करके सिकाई करें। 

८ .एक स्वस्थ व्यक्ति भी ५ पत्ती का काढ़ा बनाकर नियमित सेवन कर सकता है इससे शरीर में हरारत नहीं रहता और भोजन का पाचन सही होता है। 
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९ . गठान में :- शरीर के किसी भी अंग में गठान बन गया है तो कुछ दिन लगातार इसके काढे का सेवन करने से गठान बिखर जाता है। इसके साथ कपाल भाँति प्राणायाम अवश्य करें। 

१० .निर्गुण्डी के साथ गिलोय छः इंच मिलाकर काढ़ा बनाकर  नियमित सेवन कर सकते हैं आप कई समस्याओं से सुरक्षित रहेंगे। 

१० . निर्गुण्डी के साथ शिलाजीत का सेवन अमृत तुल्य है। 

११ . मलेरिया, टाइफाइड, वायरल फीवर में :- यदि किसी को बार बार इन समस्याओं का सामना करना पड रहा है तो उनके लिए निर्गुण्डी वरदान है। बार - बार मलेरिया ,टाइफाइड, वायरल फीवर के चक्र को खत्म कर देता है। 

१२ . यदि आप सेहत के प्रति जागरूक हैं तो अपने घर बाडी में एक पौधा अवश्य लगायें साथ ही अपने रिस्तेदारों, पडोसियों के यहाँ भी लगवायें और नियमित सेवन करें। 

यदि आप किसी भी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी निर्गुण्डी के संदर्भ में चाहते हैं तो सम्पर्क कर सकते हैं। 

इसका छः इंच कलम जमीन/गमला/पाँलीथीन में लगाने से दो महीने में पौधा तैयार हो जाता है। 

Upeshwar thakur, उपेश्वर ठाकुर

उपेश्वर ठाकुर 
योग शिक्षक पतंजलि योग समिति जिला कांकेर
9406393014

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