निर्गुंडी के औषधि उपयोग
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आलेख -- उपेश्वर ठाकुर (योग शिक्षक)
यह लेख लेखक के स्वानुभूतप्रयोग पर आधारित है। योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज एवं आचार्य बालकृष्ण जी महाराज की असीम कृपा एवं उनके द्वारा लिखित आयुर्वेदिक साहित्य अध्ययन एवं आस्था टी वी में प्रसारित आयुर्वेद जीवन दर्शन से प्रेरित होकर निर्गुण्डी पर स्वानुभूत प्रयोग करने का अवसर प्राप्त हुआ।
विभिन्न शारीरिक व्याधियों में निर्गुण्डी के उपयोग से अद्भुत व चमत्कारिक परिणाम को देख कर इस दिव्य औषधि को जन - जन तक पहुँचाने का मन किया तो प्रो. भारतेंदु समुंद महामंत्री पतंजलि योग समिति जिला कांकेर जो इंदरू केवट गर्ल्स कालेज कांकेर में सेवारत हैं ,का स्नेह भरा सानिध्य प्राप्त हुआ। समुन्द जी ने अकेले 20,000 निर्गुण्डी के कलम काट कर उपलब्ध कराया जिसे पूरे कांकेर जिले सहित नारायण पुर जिले में भी रोपण हेतु वितरण किया गया। इस अभियान में कुंदन साहू, कुमार साहू, नवीन चंद्राकार, पुनित माली फणेश्वर शर्मा जी जैसे समर्पित योग शिक्षकों ने बढचढ सहयोग दिया।
सरपंच परसूराम भोयर ग्राम पंचायत कन्हारपुरी ने तो पूरे ग्राम पंचायत के प्रत्येक घर में स्वयं 700 पौधा तैयार कर लगवाया है ।
आपको बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि निर्गुंडी एक बहु उपयोगी औषधि पौधा है जो ना केवल मनुष्य की शारीरिक व्याधि बल्कि पशुधन एवं कृषि के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।
इसका क्षेत्रिय नाम छत्तीसगढ़ में -- नेंगुर, लंगूर डारा, बिरगुड़ी आदि हैं।
यहाँ शारीरिक व्याधियों में निर्गुण्डी के उपयोग पर विस्तार से जानकारी देने का प्रयास किया गया है ।
निर्गुंडी वात , कफ नाशक तथा पित वर्धक एक प्रसिद्ध औषधि है।
वात कुपित होने के कारण
हमारे खानपान के गलत तरीकों के कारण ही शरीर में वात कुपित हो जाता है जिसके वजह से पित्त और कफ भी डिस्टर्ब या कुपित हो जाते हैं फलस्वरूप शरीर में कई प्रकार की समस्याएं पैदा होती रहती हैं ।
मुख्य वजह है वात का कुपित होना।
स्वस्थ रहने के लिए वात को समावस्था control में रखना जरूरी। वात के कारण ही शरीर में 80% समस्याएं पैदा होती हैं ।
यदि हम वात को सम अवस्था में रखना चाहे तो कुछ नियमों का पालन करना होगा जैसे जब तक भूख न लगे भोजन ना करें, भोजन चबा चबा कर खाएं। खाते समय पानी ना पियें , खाने के आधा घंटा पहले और खाने के आधा - पौन घंटे बाद ही पानी पियें।
खाना खाते समय पानी क्यों नहीं पीना चाहिए ?
हमारे पेट में भोजन के पाचन में अहम भूमिका निभाने वाली एक अग्नि है जिसे जठराग्नि कहते हैं यह जब प्रदीप्त होता है तो हमें भूख का एहसास होता है किंतु जब हम भोजन करते करते खूब सारा पानी पी लेते हैं तो यह जठराग्नि मंद पड़ जाती है , जिससे भोजन का पाचन सही नहीं होता और भोजन पेट में पड़े - पड़े सड़ता है तथा मल का निष्कासन सही नहीं होने से गैस एसिडिटी का निर्माण होता है और यही स्थिति लगातार बनी रहे तो शरीर में आमवात बनने लगता है जो शरीर के लिए बहुत ही घातक है ।आम वात की वजह से ही कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती रहती हैं।
खाते समय यदि आवश्यक हो तो कुछ घूंट पीया जा सकता है । वैसे भी यदि हम भोजन को चबा चबा कर खाएं तो पानी पीने की आवश्यकता नहीं होती ।
कुछ दिन यदि संकल्प पूर्वक अभ्यास करें तो बिना पानी के भी भोजन करना आसान हो जाता है।
रात्रि में खट्टा स्वाद वाला भोज्य पदार्थ ना खाएं यह वात कारक होता है।
सुबह उठकर तीन गिलास गरम पानी पीयें तथा रात्रि में सोने से पहले एक गिलास गरम पानी अवश्य पीयें इससे भोजन का पाचन एवं मल का निष्कासन (शौच) सही होता है ।
निर्गुण्डी के औषधि उपयोगिता
निर्गुण्डी के उपयोग के तरीके --
चूर्ण (पाउडर बनाकर )
स्वरस (जूस निकाल कर )
काढा बनाकर
तेल बनाकर
काढ़ा बनाने का तरीका --
200 ml पानी में निर्देशित मात्रानुसार निर्गुण्डी के पत्ती उबाले 50 ml (एक कप के बराबर )पानी बचना चाहिए।
1 . मुख व जीभ के छाले :-- दो-तीन पत्ती को चबा कर कुछ देर मुंह में रखें फिर थूक दें या अंदर घुटक लें।
2 . टाँसिल :- दस पत्ती को उबालकर गरारा करें तीन - चार दिन सुबह- शाम ।
3 .अपच:- दस पत्ती का काढ़ा बनाकर सेवन करें १५दिन सुबह खाली पेट चाहें तो आप लाइफ टाइम उपयोग कर सकते हैं ।
4 .गैस, कब्ज एसीडीटी में :- दस पत्ती को काढ़ा बनाकर सेवन करें सुबह खाली पेट १५दिन।
5 . पूरे शरीर में सूजन (शोथ) :- १०पत्ती का काढ़ा बनाकर सेवन करें साथ ही ५० ग्राम पत्ती को उबालकर स्नान करें ।
6 . एलर्जी :- एलर्जी में निर्गुण्डी के १० पत्ती का काढ़ा बनाकर नियमित कुछ दिन सेवन करें तथा शिलाजीत सत् ठंड के दिनों में एक चने के दाने के बराबर तथा गर्मी में एक मूंग के दाने के बराबर दुध या गुनगुना पानी में मिलाकर खाना खाने के बाद सेवन करें।
7 . घुटना या जोड़ के दर्द गठिया वात म
ें :- 50 ग्राम पत्ती को कूट कर या मिक्सी में पीस कर 400 ml पानी लेकर काढ़ा बनायें जब 100 ml पानी बचे तो 30- 30 ml सुबह, दोपहर, शाम को खाली पेट सेवन करें तथा प्रभावित अंग की सिकाई करें सिकाई करने का तरीका इस प्रकार --- 50 ग्राम पत्ती को कूट कर या मिक्सी में पीस कर थोडा प्योर सरसों तेल,हल्दी,नमक मिलाकर तवा में गरम करके सिकाई करें।
8 .एक स्वस्थ व्यक्ति भी ५ पत्ती का काढ़ा बनाकर नियमित सेवन कर सकता है इससे शरीर में हरारत नहीं रहता और भोजन का पाचन सही होता है।
9 . गठान में :- शरीर के किसी भी अंग में गठान बन गया है तो कुछ दिन लगातार इसके काढे का सेवन करने से गठान बिखर जाता है। इसके साथ कपाल भाँति प्राणायाम अवश्य करें।
10 .निर्गुण्डी के साथ गिलोय छः इंच मिलाकर काढ़ा बनाकर नियमित सेवन कर सकते हैं आप कई समस्याओं से सुरक्षित रहेंगे।
11 . निर्गुण्डी के साथ शिलाजीत का सेवन अमृत तुल्य है।
12 . मलेरिया, टाइफाइड, वायरल फीवर में :- यदि किसी को बार बार इन समस्याओं का सामना करना पड रहा है तो उनके लिए निर्गुण्डी एक वरदान है। बार - बार मलेरिया ,टाइफाइड, वायरल फीवर के चक्र को खत्म कर देता है।एक माह नियमित सेवन करें ।
13 . टाइफाइड का बुखार या इससे होने वाले समस्याओं में निर्गुण्डी कारगर पाया गया है।
14 . महिलाओं में माहवारी के समय शरीर में हल्का दर्द व हरारत होना स्वभाविक है, निर्गुण्डी के काढे के सेवन से निजात मिलता है।
15 . यदि कोई कमर दर्द से परेशान हैं तो उसे निर्गुण्डी के काढे के साथ शिलाजीत का सत भी सेवन करना चाहिए। कमर की सिंकाई उपर बताये गये विधि अनुसार करें।
16 .उच्च रक्तचाप हाई बी पी / निम्न रक्तचाप लो बीपी में:- निर्गुण्डी का सेवन बहुत फायदेमंद सिद्ध हुआ है। इसके अलावा कहुआ (अर्जुन) के १० ग्राम पाउडर का सेवन या काढ़ा बनाकर सेवन करें। एक डेढ़ माह में बीपी सामान्य हो जाता है फिर भी इस औषधि को सप्ताह में दो -तीन दिन लाइफ टाइम लेते रहें।
निवेदन
यदि आप सेहत के प्रति जागरूक हैं तो अपने घर बाडी में एक निर्गुण्डी का पौधा अवश्य लगायें साथ ही अपने रिस्तेदारों, पडोसियों के यहाँ भी लगवायें और नियमित सेवन करने प्रेरित करें।
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यदि आप किसी भी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी निर्गुण्डी के संदर्भ में जानना चाहते हैं तो सम्पर्क कर सकते हैं।
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इसका छः इंच कलम जमीन/गमला/पाँलीथीन में लगाने से दो महीने में पौधा तैयार हो जाता है फिर सुरक्षित जगह में रोपण कर सकते हैं।
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सावधानी :-
इक्का -दुक्का कुछ लोगों को यह विपरीत परिणाम देता है अतः ऐसी परिस्थिति में निर्गुण्डी का सेवन बंद कर दे या हमसे परामर्श लें।
आप बिना परामर्श के निर्गुण्डी का सेवन शुरू कर सकते हैं कम ज्यादा मात्रा में सेवन करने से किसी प्रकार का नुकसान नहीं है।
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उपेश्वर ठाकुर
योग शिक्षक पतंजलि योग समिति जिला कांकेर
9406393014
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